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...तो सउदी,जॉर्डन और मिस्र भूखे मर सकते हैं
डिजिटल डेस्क :
एक तरफ गेहूं के आयात के लिए मिस्र, इंडोनेशिया, म्यांमार और बांग्लादेश जैसे देश भारत के आगे कतार लगा के खड़े हैं क्योंकि भारत विश्व का सबसे बड़ा चावल निर्यातक देश है, जो 2024-25 में 20.19 मिलियन मीट्रिक टन से अधिक का निर्यात करता है जिसमे मुख्य रूप से बासमती और गैर-बासमती चावल सऊदी अरब, यूएई, ईरान, इराक और अफ्रीकी देशों को भेजे जाते हैं और भारत का कुल कृषि निर्यात में 18.3% हिस्सा चावल का है।
दूसरी तरफ भले इस्लाम के नाम पर उपर्युक्त देश भारत के खिलाफ खड़े हो जाते हैं लेकिन ईरान के होर्मुज बंदरगाहों पर अमेरिकी नाकेबंदी के वे कुछ भी बोलने को तैयार नहीं है और भारत भी सात साल बाद सस्ते तेल के बदले में ईरान को दवाइयां और खाद्यान्न भेजता है और इस पाबन्दी से कोई भी देश इन मुस्लिम देशों को खाद्यान्न और दवाइयां नहीं भेज पाएगा जिससे इन देशों में अनाज की कमी के कारण भूखमरी बढ़ सकती है।
अमेरिकी नाकेबंदी के खिलाफ रूस की सुरक्षा परिषद ने चेतावनी दिया है कि अगर होर्मुज में 3 महीने तक नाकेबंदी रही, तो सऊदी अरब, जॉर्डन और मिस्र में खाद्य सुरक्षा पर बड़ा खतरा पैदा हो सकता है जिससे वहां की आम जनता भूखी मर सकती है और इस संकट के कारण दुनिया में भूख से जूझने वाले लोगों की संख्या में करीब 4.5 करोड़ की बढ़ोतरी हो सकती है। इसके अलावा, यूरोप के किसानों को भी मजबूरी में फर्टिलाइजर के लिए उत्तरी अफ्रीका, उत्तरी अमेरिका और रूस पर निर्भर होना पड़ेगा।
चीन के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता गुओ जियाकुन ने भी पत्रकारों से कहा कि टारगेटड अमेरिकी नाकाबंदी से तनाव और बढ़ेगा एवं साथ ही पहले से ही नाजुक दौर से गुजर रहे सीजफायर समझौते को और भी ज्यादा नुकसान पहुंचेगा और ऐसे तानाशाही रवैए से 'स्ट्रेट ऑफ़ होर्मुज से आवाजाही की सुरक्षा भी खतरे में पड़ जाएगी।
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